• Karni Mata Chirja Lyrics 

  • करणी माता चिरजा लिरिक्स


नाथ चौढाणी वाऴौ !!

चिमनदानजी सांदू !!

मामो म्हारो है भैरव मतवाऴौ,
ओ तो नाथ चौढाणी वाऴौ !!

स्याम गौर सोभा अति सुन्दर,
रति पति सूं रूपाऴौ !
ससि पून्यू वांरा मुख री सोभा,
रिध सिध राखण वाऴौ !!

तेल फुलेल बसत अंग अंग में,
लसत सीस लटियाऴौ !
तन मंजन सिन्दूर सुहावत,
कनक नयन फुलवाऴौ !!

डमक घमक घूघर कर डैरूं,
निरत करत निरवाऴौ !
लोटत गिरत उठत फिर नाचत,
चिरत करत चिरताऴौ !!

रांमत रमत मंडोवर मांही,
वीर खङ्यो है वैताऴौ !
कटि कछनी सोहै अति सुन्दर,
भँवर कँवर भोपाऴौ !!

कोटवाऴ कासीपुर वाऴौ,
करण दुष्ट खय काऴौ !
संकट हरण देण सुख संपत,
प्रीत रखण प्रतिपाऴौ !!

चारण नख सांदू मालावत,
गांव सुंन्दर पुर वाऴौ !
शंकर सुत गावत कवि चिमनूं,
मनङा री है लखवाऴौ !!

चिमनदानजी सांदू ढाणी पिपराऴी सीकर 
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हेत तज केथ गयो जी लटियाऴा !
भांणेवां री सुध लीज्यो भोपाऴा !!

खेमदान जी बारहठ कृत !!

भाषा व भाव दोनो ही पक्षोंसे समुज्जवल भैरवनाथ की वंदना मे खेमदानजी बारैठ ने चिरजा मे प्रांण स्रजन कर दिये है साथ ही भैरवनाथ के भक्त की पुकार पर नही पधारने के व अन्य अनेक स्थानो पर होने वाले अटकावों का सुंन्दरत्तम खाखा खैंच दिया है कि हे भैरूनांथ तूं नही आयेगा तो यह सदामद पूर्व मे उदय होने वाला सूर्य पिछम दिस उगेगा, तूं कलाऴी के आवास पर अत्यधिक मदपान के आगोश मे आ गया कि बाग की सुंदर कोंपलों मे तेरी पंखुङियां उऴझ गयी जब तूं भ्रमर रूप में गुंजार करने पहुंचा, या तुझे देवराज की सभा मे वीणावादन पर मोहित होकर परियों ने रिझा लिया, ऐक अन्य आशंका यह भी है कि तुं दम्भी (दुमुंहा सर्प जो कि श्रीकरनी माँ का ही स्वरूप होता है) का पुत्र बनकर बम्बी मे चला गया जहां पर नागिनों पर आसक्ति मे रत हो गया और या तेरा समाधि रत होकर मृगछाला पर बैठकर दीन हीन भक्तो को भुलाकर भक्ति मे लीन हो जाना भी मेरे लिये तेरे दर्शन के दूर होने का कारण बन पङ रहा है पर मैं खेमदान तुझे अहरनिश सुमिरण करता हूं तूं सिंहारूढ शक्ति माँ के अगवाणी होकर मुझे दर्शन देने पधार !!

भाषा भाव व अनुप्रास आदि के सुन्दर संयौजन की भैरवानाथ की रचना !!

हेत तज केथ गयो जी लटियाऴा !
भांणेवां री सुध लीज्यो भोपाऴा !!

कछनी कटियां अंतर लटियां,
भटियां पर भोपाऴा !
नटियां रवि पिछमांण उगेला,
रटियां आव रसाऴा !!

जूनां जोगी तूं रस भोगी,
खऴ थोगी खपराऴा !
अथग अरोगी ज्यादा होगी,
मद वश होयो मतवाऴा !!

सुगन्ध रसीला बाग बसीला,
भँवर बण्यो काँई काऴा !
रस वश थारी पंखिया उऴझी,
उङ न सक्यो रे उंताऴा !!

इन्द्र बुलायो तूं मन भायो,
मधुरी बीण बजाऴा !
परियां रिझायो क्यूं नही आयो,
घूघरिया घमकाऴा !!

बङियो बंम्बी बण सुत दंम्भी,
लम्बी भांय पताऴा !
सुरत अचम्भी नागण्यां मोह्यो,
कर कर मणि उजियाऴा !!

आसण डारी विमर मंझारी,
तऴ डारी मृगछाऴा !
दसवीं बारी सांस चढारी,
कान कपाट कराऴा !!

"खेमो" गरजी सुणलै अरजी,
मरजी कर मतवाऴा !
सिंघ चढी ने सागै ल्याज्ये,
गरज सा'र गुरजाऴा !! 

हेत तज केथ गयो जी लटियाऴा !
भांणेवां री सुध लीज्यो भोपाऴा !!

खेमदानजी बारहठ कृत !!

राजेन्द्रसिंह कविया संतोषपुरा सीकर !!
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श्री आद शक्ती आवड़ माता कै बावन नाम बावन धाम वर्णन छंद भुजंगी कवि मधुकर माड़वा ।

शुभ वर आवड़ जग सरै ,
निज कर बावन नाम ।
मधुकर वरणै माड़वै ,
धर पर बावन धाम ।(1)

मुणी मात आई ,बणी मांमड़ाई,
पुणी आशपुर्णा ,पिता तो पुराई ।
सुणी साथ बीरो ,तमै बैन साता ।
महा योगणी तूं आईनाथ माता 2
मनां शीव तालाब ,मानासरेची ।
नमो शैंस नागा ,सुता नागणैची ।
वड़ां चाड़ वा डाल आवड़ बड़ी तूं 
भवा भीड़ भंजाड़ भोजा सड़ी तूं 
शिला जा चड़ी तारंगा तो सुहावै ।
कठै झोल बायां उपरली कहावै ।
धणीयांण कहै तोय लोक धावै ।
महा मांमड़ा मढ सिंधां मंडावै ।3
हठी हाकड़ो सोखणी मात हाली ।
पनांतांण पांणी बणी पी प्रचाली ।
विसाखै खडै खोद गंगा वधाई ।
रवंता सरी तो परैचा रखाई ।4
वणी तूं डुगंरैच गिरां विराजी ।
रवी रोक भयी रवी राय राजी ।
रवैची बणी आप भांनू रुकाया।
सिहासण तणू सांगियां सजाया ।
थिरा तो तणोटी तणू थान थपी ।
अजोनी विजैराव कूं चूड़ अपी ।
बणी राकसां रीड़ घंटीयाल बाजी
 पणी पांण जोड़ै परैवां प्रकाजी ।6
भणै भादरी राय तूं ही भवानी ।
पुणै डूंगरै शाम तूं ही पुजानी ।
भुरै गिरवरै राय तो नाम भाखी ।
रधै राकसे तेमड़ै देग राखी ।7
भवा भाखरै मेघ री भीर आवी ।
खगां सेलतां साबड़ा बूग खावी ।
चहां चेलका सीम धेनू चरानी ।
सतां बैन तो तैमड़ै में समानी ।8
अदीठां चकरां तूं ही तूं उपानी ।
मही माड़ रैवास माड़ैच मानी ।
धनो आरमला तूं ही तूं धरैची ।
उनड़ैच धरा बणी ऊनड़ैची ।9
सुणी सपता मात सातै सवांणी ।
तमां तैमड़ा आसुरा पर तपाणी ।
भलां जोगणी रूप अंकास भमै ।
सदा साधवी नाम तोरो सुनंमै।10
रही चालका गांम तणी रैवासी ।
हथां चालको मार देवी हुलासी ।
मनंरंग धोरै रमी मांमड़ाई ।
छती छंछुदी रूप मढां में छाई ।1
गुणी गाय आगोर गिरां गुणान
मया मोहवृती तोहु पूत्र मानी ।
कतै हाथ चरखा भयी कातयानी ।
कहै सूमरा नूर पापो कटानी ।12
अयै मात मेवाड़ अवरी उचारी ।
धरा निबका राय तो रूप धारी ।
निबांधर मात धामा निपाया ।
विजणोट री राय तोही बताया ।
अहो अलरा राय तूंही अमांमी ।
जुनी जोगणी माय तूं अतर्जामी।
मुदै नाम तो धाम बावन मानी ।
भणै माड़वै भमर नमो भवानी ।15 🙏🏼🙏🏼⛳
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करुणा करणी सर्जन करणी,पालन करणी लालन करणी।
साधन करणी साध्य करणी,साधक सफला मनोरथ करणी।।
सुमति करणी सम्पद करणी,वैभव करणी आनंद करणी।
मंगल करणी प्रमोद करनी,प्रबोध करणी सुबोध करणी।।
 रोग नशाय निरोग करणी, सुजोग करणी सौभाग करणी।
धरणी भार संहार करणी,भवसिंधु तरणी तार करणी।।
 अघ कानन दावानल करणी,रोग निवारण भैसज करणी।
दृग कोर करि करुणा की करणी,'राज'शरण पकरि माँ करणी।।जय माँ


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श्री करणी गीत चित विलास चार तुक मात्रा चवुदै ,,पोचवी तुक मात्रा आठ भेलो जिकारो ,हर तुक अनुप्रास मोहरा मेल ।हर झड़ अंत दो गुरू ,,पहली झड़ जिकारो अर पांचवी छैहली झड़ जिकारो आ गीत विधि कवि मधुकर।

      गीत चित विलास 
करणी जी माँ करणी जी ,
कथ जोड़ भजो करणी जी ।
हर संकट वा हरणी जी ,
सब पावत जग शरणी जी ।
जी करणी जी ।(1)

देशांणो जी देशांणो ,
देखो भगतां देशांणो ।
धन धरणी धाम धरांणो ,
काबां रो जो कमठांणो ।
जी देशांणो ।(2)

डाढाली जी डाढाली ,
डाढी डोकर डाढाली ।
भव समरै जिण शुभ भाली ,
राखै दिन रात रुखाली ।
जी डाढाली ।(3)

गुण गावो जी गुण गावो ,
गीतां छंदां धुन गावो ।
मधुकर उठ रोज मनावो ,
चित चरणां हित मन चावो ।
जी गुण गावो ।(4)
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